ग्वालियर।जीवन का सार भलाई है। जीवन में किसी की मदद नहीं की, किसी का भला नहीं किया तो इस मानव जीवन का औदित्य ही क्या है ? यदि मनुष्य जन्म मिला है तो जाति-पाति का भेदभाव मिटाकर जीवन को परमार्थ में लगा दो। नि:स्वार्थ भाव से परमार्थ में जुट जाओ। स्वार्थ को त्यागना ही सबसे बड़ी तपस्या है। धन दौलत का धमंड क्या करना, यह तो अस्थिर है। आज है कल नहीं है। हर जगह पैसा काम नहीं आता, दुनिया को जीतने के लिए ह्दय की विराटता चाहिए। इसलिए धन को परमार्थ में खर्च करो। किसी को दुश्मन मनाने वाला भाव ही वास्तव में स्वयं का सबसे बड़ा दुश्मन है। जीवन में दुश्मन को नहीं दुश्मन के भाव को हटाना है। किसी को पीड़ा पहुंचाना शैतान का काम है। ऐसे लोग दुनिया के लिए बोझ हैं।
उक्त उद्गार राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागरजी महाराज ने आज बुधवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कालोनी अजय विजय जैन के निवास पर कोरोना वायरस से मुक्ति दिलाने के लिए 25 से 2 अप्रेल तक अनुष्ठान एवं आरधान में व्यक्त किए। इस मौके पर मुनिश्री विजयेश सागरजी महाराज मोजूद थे!
मुनिश्री ने कहा कि सुबह उठने पर सबसे पहले प्रभु से संसार के सभी प्राणीमात्र की कुशल क्षेम की प्रार्थना करो। इससे बड़ी जीवन में कोई प्रार्थना कोई पूजा नहीं है। उसके बाद जब प्रभु के समक्ष जाओ तो उनके गुणों का चिंतन करो और जब ध्यान मे जाओ आत्मा के गुणों का चिंतन करो। मुनिश्री ने कहा कि जब तक हम अपने अस्तित्व को नहीं पहचानेंगे तब तक वीकारों में फंसे रहेंगे और दु:खी रहेंगे। पर वस्तुओं को मानना ही मान कषाय है।
जिनेंद्र भगवान का अभिषेक कोरोना वायरस से मुक्ति दिलाने के लिए किया! मंत्रो से हवन किया!
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज 25 से 2 अप्रेल तक साधन, अखण्ड मौन, उपवास एवं अनुष्ठान प्रधानमंत्री के आव्हान कोरोना वायरस मुक्ति दिलाने के लिए तपस्या करेंगे! आज प्रातः मुनिश्री विहर्ष सागरजी ने मंत्रो का उच्चारण कर भगवन आदिनाथ का अजय जैन विजय जैन ने अभिषेक ओर शांतिधारा कोरोना से बचाने के लिए कराया ! पुरुष और महिलाओ ने पूजा कर हवन कुंड में विश्व मे कोरोना वायरस से बचाने के लिए मंत्रो का उच्चारण कर आहुतिया दी!
मुनिश्री सुबह ओर शांम को 2 घंटे मौन खोलकर अनुष्ठान करेंगे! पूरे दिन एक कमरे में बंद होकर साधन ओर जाप्य करेंगे!
स्वार्थ को त्यागना ही सबसे बड़ी तपस्या -मुनिश्री